Friday, July 9, 2021

ऐसा क्यों होता है


ऐसा क्यों होता है? वो आस पास है, 

फिर भी बहुत याद आता है।

ऐसा क्यों होता है? बात होती है, फिर भी 

खामोशी में कुछ दबा रहता है। 

ऐसा क्यों होता है? हर पल कुछ अधूरा सा 

लगता है।  

ऐसा क्यों होता है? उसके रंग हमारे लिए नहीं है,

ये एहसास घेर जाता है। 

ऐसा क्यों होता है?  ये प्यार सही ग़लत के दायरों में क्यों बंध जाता है? 

मुस्कुराहट, दो शब्द, कुछ पल और उसकी नज़रे इनायत,

कुछ ज्यादा तो नहीं मांग रहे, फिर भी ऐसा क्यों होता है,  

सूफी सा ये प्यार कुछ मांगता नहीं, जिससे भी होता है ये उसे बांधता नहीं, 

फिर भी ऐसा क्यों होता है? 

ऐसे प्यार को समझना इतना मुशकिल क्यों होता है? 



Monday, July 5, 2021

सफर खूबसूरत है, मंजल से भी


दिल के बंद दरवाज़े किर किरा कर खुले,

जिंदगी की तंग राहों पर कुछ फूल खिले,  

इश्क, प्यार और मोहब्बत की बातें हम करने लगे, 

कुछ साथ ऐसे मिले, जो नई उमंग जगा गए। 


अजनबी शहर, नए अंदाज़, कुछ भीगे अलफाज़

सुनसान राहों में वो गाने गुनगुनाने की आवाज़, 

कभी बारिश, कभी सुहानी हवा का चहरे पर वो एहसास, 

रास्ते में कभी ढेरों बातें, तो कभी बस सवाल एक आद,  

वो शहर घूमने घूमाने का जवां सा अंदाज़, 

बेतकलुफी से पार कर गया दिल के दरों दीवार। 


मैं सोचती थी, मुझमें जो इशक है उससे दिल-ए-ज़ार न होगा,  

प्यार जो ज़हन की गलियों में खोया है उसपर गौर न होगा,  

लेकिन, जिंदगी की डोर हमारे हाथ में नहीं, 

इस सफर की भोर हमारे हाथ में नहीं, 

तो अब कोई इश्तियाक, कोई इलतजा नहीं,  

इस खूबसूरत सफर को किसी मंजिल की चाह नहीं ।  



यकीन का सफर

समय हर पल समान नहीं होता,  

खुद पर यकीन का सफर आसान नहीं होता,

कई लम्हें ऐसे आएंगे ज़िंदगी में, जिनका कोई मुकाम नहीं होता,

यकीन उनपर करो जिन्हें तुम पर भरोसा है, 

भरोसा ख़ुद पर करो, ताकत बनता है, 

सफर ज़िंदगी का तभी तो जहां- नुमा बनता है। 


तैयार रहो पग-पग पर जंग होगी, 

यकीन के सफर की हर राह तंग होगी, 

रिश्तों के भंवर पैरों को जकड़ेंगे, 

समाज के कायदे हर कदम को पकड़ेंगे, 

ऐतबार बस खुद पर करना तुम, 

प्यार पहले खुद से करना तुम, 

सूफी भी बनाएगा ये यकीन का सफर, 

परवाज़ बन कर बेझिझक बढ़ना तुम।  


जो साथ दें उनपर न्यौछावर होना, 

जो न समझें उनके लिए मत रोना, 

जिंदगी क्या है चंद लम्हों की जागीर है, 

अपनी झोली को यादों से भरना, 

गम न करना किसी के बिछड़ने का, 

हर कोई लेकर आता है समय गिनती का, 

खुद के दायरों से हमें खुद ही है जीतना  

तभी तो बनेगा सफर यकीन का। 







Tuesday, June 29, 2021

ये कैसा इश्क


धड़कनो का तेज़ होना पहली बार जाना है, 

इंतज़ार की इंतहां को पहली बार पहचाना है,

मन कुछ इस तरह से हारा है, 

न जाने किस मुशकिल की ओर इशारा है, 


तुम्हारी खुशबू  हर तरफ से आ रही है, 

मेरी मौजूदगी तुम्हारा अक्स चाह रही है, 

तुम्हारे आसपास होने से, अपने वजूद का एहसास होता है, 

अब धीरे धीरे खुद से प्यार हो रहा है।  

बात शादय न हो कुछ खास करने को,  

तेरा सामने बैठना ही बहुत है सांस भरने को, 

आखों को तेरी आदत सी हो गई है,  

मेरी राहों को तुम्हारी चाहत सी हो गई है,  

कहां ले जाएगा ये दिल न जाने, 

मीठी सी उलझन की आहट सी हो गई है, 


तुम खुश हो तो खुश रहता है मन, 

तुम्हें उदास देख, डूबती है हर धड़कन, 

जुंबा पर कभी नहीं आएगा ये ऐसा इश्क है, 

पन्नों में दबा रह जाएगा ये ऐसा इश्क है, 

खुद से पूछते हैं हम ये कैसा इश्क है? 

दुआ बन जाएगा ये ऐसा इश्क है।

Saturday, June 19, 2021

आंसू

मुझसे इन आंसुओं कि वजह न पूछो,

ये बिना इजाज़त ही छलक जाते हैं, 

तुम्हारे साथ होने पर भी तुम्से दूर होने का गम मनाते हैं, 

इनको रोकती हूं, समझाती हूं, 

लेकिन मन से बार बार हर जाती हूं, 

जानती हूं, न ये फासलों को 

मिटा पाएंगे, न जिंदगी की कशमकश को 

सुलझा पाएंगें, बस बहते जाएंगे। 


मुझसे इन आंसुओं कि वजह न पूछो, 

ये मेरे दिल की जुबां भी न बन पाएंगे, 

गलत, सही की समझ नहीं है इन्हें, 

ये मेरे हाल पर बस तरस खाएंगे, 

ये आंसू मेरे बस बहते जाएंगे, 

खुशी में मेरे दिल का साथ निभाएंगे, 

तुमहारे साथ होने के, हर पल को ये मनाएंगे। 

 

मुझसे इन आंसुओं कि वजह न पूछो, 

तुमने जो एहसास जगाएं हैं ये उनको जी रहे हैं, 

दिल की हर धड़कन के साथ ये दुआ दे रहे हैं,  

सिर्फ आंखों से छलका पानी नहीं हैं ये,  

तुम्हें बुलंद परवाज़ देखने के जज़्बात हैं, 

मुझसे मेरे आंसुओं की वजह न पूछो......

 




एहसास


ज़िन्दगी के रास्ते में एक एहसास मिला, 

एहसास जो बेहद अपना सा लगा, 

इसे अपना ले ये मन ने कहा,  

बिना किसी बंधन में न बांधे, 

वो एहसास पल पल में उतरने लगा। 


पाकीज़ा सी दोस्ती का एहसास, 

बचपन की मासूमियत है इसमें,

जवानी का अल्हड़पन,  

जूनून नहीं कोई, एक शांत सा समंदर,

इसे कोई नाम कैसे दे दूं, 

इसे किसी सोच से कैसे बांध दूं,

एक एहसास है ये, डूबने के लिए खास है ये,  


इस एहसास से जब राब्ता हुआ, 

खुद पर फिर से यकीन हुआ,

नहीं जानती ये क्यों हुआ, 

सही हुआ या गलत हुआ, 

अब जो हुआ सो हुआ। 


देख कर उसे आंखों को सूकून मिलता है, 

कुछ उसकी सुनने, कुछ अपनी कहने का जी करता है,

कभी बस साथ गुनगुनाने का जी करता है,

समाज की सभी बंदिशों से परे,

सब कुछ भूल जाने का जी करता है,

एहसास का रूप होता है ये जाना नहीं था,

जब मुलाकात हुई तो कुछ देर तक माना नहीं था,

लेकिन इस एहसास ने जिंदगी को ऐसे छुआ, 

धड़कने का एहसास फिर दिल को हुआ। 


Thursday, May 27, 2021

पहचान!

एक सननाटा सा पसरा है
हर तरफ एक बेबसी सी है
चले थे हम अपनी पहचान बनाने 
खड़ें हैं आज एक नए जहां में

ये क्या है जो घट रहा है 
इंसान का वजूद नमुकमल लग रहा है
बिखरे बिखरे ख्वाब हैं और बिखरे बिखरे जज़बे
हर तरफ अफरा तफरी सी है
एक बेचैनी सी है

कोई ठीक नहीं, कोई गलत भी नहीं 
कोई अलग नहीं, कोई साथ भी नहीं
बेरुखी सी है वक्त में
खुश रहने की बात भी बेमानी सी है

कहां खड़े हैं कुछ पता नहीं
कहां को जाएंगे जानते नहीं 
भटकी सी रूह
भटकी सी पहचान
भटका सा मन

खुद के अस्तित्व की खोज में 
खुद ही से लड़ रहे हैं हर रोज़ में
किस पहचान को बनाए रखने की कोशिश में हैं
किस जहान को सजाए रखने की कोशिश में हैं
क्या रिश्ते समेटने से पहचान बनी रहती है?
या नाम जोड़े रखने से पहचान बनी रहती है?

नाजुक सी डोर है ये जीवन, इसे जीने की तू कोशिश कर 
जो घटना है वो घटेगा, ये समझने की तू कोशिश कर
किस पहचान की चाह में है मन 
मिलना तो मिट्टी में है हर कण .........