Monday, July 5, 2021

सफर खूबसूरत है, मंजल से भी


दिल के दरवाज़े कितने भी बंद कर लो,

मौहब्बत ने होना हो तो हो ही जाती है, 

जिंदगी की राहें कितनी भी तंग कर लो, 

इश्क की हवाओं ने छाना हो तो छा ही जाती हैं, 

अजनबी शहर में तुम्हारा साथ, 

सुनसान राहों में तुम्हारे गुनगुनाने की आवाज़, 

कभी भीगी भीगी बारिश, कभी हवा बिनदास, 

रास्ते में कभी ढेरों बातें, तो कभी बस सवाल एक आद,  

वो शहर घुमाने का तुम्हारा अंदाज़, 

बेतकलुफी से पार कर गया सारे दरों दीवार.


मैं सोचती थी मुझसे अब प्यार न होगा, 

मुझमें जो इशक है उससे दिल-ए-ज़ार न होगा,  

प्यार तो ज़हन में है अब, ये जग ज़हिर हो ज़रूरी तो नहीं, 

रुहानी इस प्यार को मंजिल तलाश नहीं।

  

वो मेरा बेपरवाही से हाथ थामना,  

वो तुम्हारा छोटी छोटी बातों को बिन कहे समझ लेना, 

वो मुस्कुराना और कुछ अपनी कह जाना, 

अपने चहरे पढ़ लेने की आदत पर इतराना, 

मुशकिल में सबके काम आना, 

खुद के ग़म को छिपा जाना, 

इस सफर कि यादों को समेट रही हूं मैं,

सोचती हूं कि कहीं ज्यादा तो नहीं सोच रही हूं मैं, 

इन छोटी छोटी बातों के मायने बहुत हैं मेरे लिए, 

पर, किसी से कोई इशतियाक, कोई इलतजा नहीं,  

क्यों की ये सफर खूबसूरत है मंजिल से भी।  



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