Tuesday, July 20, 2021

नमी


फिर हुईं आखें नम और प्यार याद आया,

दिल में छुपा के रखा है वो ख्याल याद आया,

इस दहलींज़ पर, अकेला, मेरा इंतजार है, 

मेरे प्यार को वहां से गुजरना भी नगवार है.  

बुनता है बेहिसाब जज़बातों की चादर ये दिल,

फिर जार जार रोता है ये दिल.


फिऱ हुईं आखें नम और प्यार याद आया,

दिल में छुपा, वो इज़हार याद आया, 

अपने इश्क की सर ज़मीन तुमको मान लिया, 

अपनी हंसी, अपनी कमी तुमको जान लिया.

हां, हमारे रास्ते अलग हैं ये भी पहचान लिया। 


फिर हुईं आखें नम तो हमने जान लिया, 

खयालों की हमारी महफिल में सब कुछ है कम.

बस प्यार से चलती कहां है ये दुनिया, 

सिर्फ एहसासों से पिघलती कहां है ये दुनिया, 

चाहत के रास्तों पर हम ग़म से मयस्सर हैं, 

कोई हमसे भी टूट कर करे प्यार , 

ये ख्वाब हमारा, अरमानों के सर है। 

फिर हुईं आखें नम और दिल को समझाया,

जिंदगी के इस पड़ाव पर कोई नहीं है हमसाया।    

 

Friday, July 9, 2021

ऐसा क्यों होता है


ऐसा क्यों होता है? वो आस पास है, 

फिर भी बहुत याद आता है।

ऐसा क्यों होता है? बात होती है, फिर भी 

खामोशी में कुछ दबा रहता है। 

ऐसा क्यों होता है? हर पल कुछ अधूरा सा 

लगता है।  

ऐसा क्यों होता है? उसके रंग हमारे लिए नहीं है,

ये एहसास घेर जाता है। 

ऐसा क्यों होता है?  ये प्यार सही ग़लत के दायरों में क्यों बंध जाता है? 

थोड़ी सी मुस्कुराहट, दो शब्द और मेरे वजूद के लिए उसकी नज़रे ही बहुत हैं,

सूफी सा ये प्यार कुछ मांगता नहीं, जिससे भी होता है ये उसे बांधता नहीं, 

फिर भी ऐसा क्यों होता है? 

ऐसे प्यार को समझना इतना मुशकिल क्यों होता है? 



Monday, July 5, 2021

सफर खूबसूरत है, मंजल से भी


दिल के दरवाज़े कितने भी बंद कर लो,

मौहब्बत ने होना हो तो हो ही जाती है, 

जिंदगी की राहें कितनी भी तंग कर लो, 

इश्क की हवाओं ने छाना हो तो छा ही जाती हैं, 

अजनबी शहर में तुम्हारा साथ, 

सुनसान राहों में तुम्हारे गुनगुनाने की आवाज़, 

कभी भीगी भीगी बारिश, कभी हवा बिनदास, 

रास्ते में कभी ढेरों बातें, तो कभी बस सवाल एक आद,  

वो शहर घुमाने का तुम्हारा अंदाज़, 

बेतकलुफी से पार कर गया सारे दरों दीवार.


मैं सोचती थी मुझसे अब प्यार न होगा, 

मुझमें जो इशक है उससे दिल-ए-ज़ार न होगा,  

प्यार तो ज़हन में है अब, ये जग ज़हिर हो ज़रूरी तो नहीं, 

रुहानी इस प्यार को मंजिल तलाश नहीं।

  

वो मेरा बेपरवाही से हाथ थामना,  

वो तुम्हारा छोटी छोटी बातों को बिन कहे समझ लेना, 

वो मुस्कुराना और कुछ अपनी कह जाना, 

अपने चहरे पढ़ लेने की आदत पर इतराना, 

मुशकिल में सबके काम आना, 

खुद के ग़म को छिपा जाना, 

इस सफर कि यादों को समेट रही हूं मैं,

सोचती हूं कि कहीं ज्यादा तो नहीं सोच रही हूं मैं, 

इन छोटी छोटी बातों के मायने बहुत हैं मेरे लिए, 

पर, किसी से कोई इशतियाक, कोई इलतजा नहीं,  

क्यों की ये सफर खूबसूरत है मंजिल से भी।  



यकीन का सफर

समय हर पल समान नहीं होता,  

खुद पर यकीन का सफर आसान नहीं होता,

कई लम्हे ऐसे आएंगे ज़िंदगी में, जिनका कोई मुकाम नहीं होता,

यकीन उनपर करो जिन्हें तुम पर भरोसा है, 

भरोसा ख़ुद पर करो, ताकत बनता है, 

सफर ज़िंदगी का तभी तो जहां- नुमा बनता है। 


तैयार रहो पग पग पर जंग होगी, 

यकीन के सफर की हर राह तंग होगी, 

रिशतों के भंवर पैरों को जकड़ेंगे, 

समाज के कायदे हर कदम को पकड़ेंगे, 

ऐतबार बस खुद पर करना तुम, 

प्यार पहले खुद से करना तुम, 

सूफी भी बनाएगा ये यकीन का सफर, 

परवाज़ बन कर बेझिझक बढ़ना तुम।  


जो साथ दें उनपर न्यौछावर होना तुम, 

जो न समझें उनके लिए मत रोना तुम, 

जिंदगी क्या है चंद लमहों की जागीर है, 

अपनी झोली में यादें बटोरना तुम, 

गम न करना किसी के बिछड़ने का, 

हर कोई लेकर आता है समय गिनती का, 

हमें खुद ही जीतना होता है खुद के दयरों से

तभी तो बनता है सफर यकीन का। 







Tuesday, June 29, 2021

ये कैसा इश्क


धड़कनो का तेज़ होना पहली बार जाना है, 

इंतज़ार की इंतहां को पहली बार पहचाना है,

मन कुछ इस तरह से हारा है, 

न जाने किस मुशकिल की ओर इशारा है, 


तुम्हारी खुशबू  रोम रोम में समा रही है, 

मेरी मौजूदगी तुम्हारा अक्स चाह रही है, 

तुम्हारे आसपास होने से, अपने वजूद का एहसास होता है, 

तुम्हें देख देख खुद से प्यार होता है।  

बात शादय न हो कुछ खास करने को,  

सामने बैठना ही बहुत है सांस भरने को, 

इन आखों को तुम्हारी आदत सी हो गई है,  

मेरी राहों को तुम्हारी चाहत सी हो गई है,  

कहां ले जाएगा ये दिल न जाने, 

मीठी सी उलझन की आहट सी हो गई है, 


तुम खुश हो तो खुश रहता है मन, 

तुमहें उदास देख कर डूबती है हर धड़कन, 

जिंदगी के इस मोड़ पर क्यों मिले हो तुम, 

ये हम शायद कभी न समझ पाएंगे, 

उम्र के ये फासले हर पल बीच आएंगे,

समाज के बंधन हर एहसास को दबाएंगे, 

जुंबा पर कभी नहीं आएगा ये ऐसा इश्क है, 

पन्नों में दबा रह जाएगा ये ऐसा इश्क है, 

खुद से पूछते हैं हम ये कैसा इश्क है? 

दुआ बन जाएगा ये ऐसा इश्क है।

  

 

 


  


Saturday, June 19, 2021

आंसू

 मुझसे इन आंसुओं कि वजह न पूछो,

ये बिना इजाज़त ही छलक जाते हैं, 

तुम्हारे साथ होने पर भी तुम्से दूर होने का गम मनाते हैं, 

इनको रोकती हूं, समझाती हूं, 

लेकिन मन से बार बार हर जाती हूं, 

जानती हूं, न ये उम्र के फासलों को 

मिटा पाएंगे, न जिंदगी की कशमकश को 

सुलझा पाएंगें, बस बहते जाएंगे। 


मुझसे इन आंसुओं कि वजह न पूछो, 

ये मेरे दिल की जुबां भी न बन पाएंगे, 

गलत, सही की समझ नहीं है इन्हें, 

ये मेरे हाल पर बस तरस खाएंगे, 

ये आंसू मेरे बस बहते जाएंगे, 

खुशी में मेरे दिल का साथ निभाएंगे, 

तुमहारे साथ होने के, हर पल को ये मनाएंगे। 

 

मुझसे इन आंसुओं कि वजह न पूछो, 

तुमने जो एहसास जगाएं हैं ये उनको जी रहे हैं, 

दिल की हर धड़कन के साथ ये दुआ दे रहे हैं,  

सिर्फ आंखों से छलका पानी नहीं हैं ये,  

तुम्हें बुलंद परवाज़ देखने के जज़्बात हैं, 

जो आखों से बह रहे हैं, 

मुझसे मेरे आंसुओं की वजह न पूछो......

 




एहसास


कौन हो तुम, शायद एक एहसास

एहसास जो अपना सा लगता है, 

एहसास जिसे अपनाने को जी करता है, 

किसी बंधन में बांधने का नहीं, 

बस महसूस करने का जी करता है, 

हाथ थाम कर फिज़ा में उड़ने का जी करता है। 


पाकीज़ा सी ये दोस्ती है

बचपन की मासूमियत है इसमें,

जवानी का अलहड़पन,  

जूनून नहीं कोई, एक सधा हुआ समंदर है,

इसे कोई नाम कैसे दे दूं, 

इसे किसी सोच से कैसे बांध दूं,

एक एहसास है ये, जिसमें डूब जाने का जी करता है। 


देख कर उसे आखों को सूकून मिलता है, 

वो तारों से भरे नीले आसमान सा सूकून

कुछ उसकी सुनने, कुछ अपनी सुनाने का जी करता है,

कभी उसके साथ गुनगुनाने का जी करता है,

समाज की सभी बंदिशों से परे,

सब कुछ भूल जाने का जी करता है,

बेहद सूफी सा ये एहसास है, लेकिन

पता नहीं था, एहसास का ये रूप देखा नहीं था,

इस रूप को बेपरवाह जीने का जी करता है।


एहसास से यूं राबता सा महसूस हुआ, 

खुद पर फिर से यकीन हुआ,

नहीं जानती ये क्यूं हुआ, 

सही हुआ या गलत हुआ, 

अब जो हुआ सो हुआ। 

इस एहसास ने जिंदगी को ऐसे छुआ, 

धड़कने का एहसास फिर दिल को हुआ।