Sunday, September 26, 2021

तू क्या है?

हर बात से पहले सोच कि तू क्या है,

हर ख्वाब से पहले सोच कि तू क्या है, 

अहल-ए-जहां में कई दावेदार आए गए, 

हर गुजारिश से पहले सोच कि तू क्या है।


लम्हें में गुम होना आसान है, 

खुद से रूठना भी मुमकिन है, 

लेकिन क्या खुद को पहचानने के लिए तू परेशान है? 

हर कदम से पहले सोच कि तू क्या है, 

हर कथन से पहले सोच कि तू क्या है।


ये जिंदगी मौके कई देगी तुझको, 
इन मौकों को भुना और सोच कि तू क्या है,
खुद को रोज दे नई चुनौतियां, 
हर चुनौती को पार कर सोच कि तू क्या है, 

न होना बदगुमान, खुद से रहना तू बहम, 
ऐसा कर मन कि उसमें रह न पाए कोई ग़म, 
हर पल में जान तू जीने का दम, 
जिसे हो ज़रूरत उसे लगा मरहम, 
फिर होकर खुद में गुम, सोच कि तू क्या है। 

हर दिन की सहर में सोच कि तू क्या है, 
हर शाम की शब में सोच कि तू क्या है, 
जोश से आगे बढ़ता चल और सोच कि तू क्या है, 
जिंदगानी के हर पल में सोच कि तू क्या है, 
बस रहमत है उस खुदा कि वरना तू क्या है।

Monday, September 6, 2021

तलाश

हर लहर को तलाश है किनारे की, 
हर नदी तलाश रही है अपना समंदर, 
हर दीवाना को तलाश एक दिल की, 
तलाश में जो बेचैनी है न, 
उसको भी तलाश है, तलाश खत्म होने की,
किसी न किसी तलाश में सभी गुम हैं, 
सफर भी, मुकाम भी, इंतजार भी, मंजिल भी,  

हर किसी को तलाश है,  
खुशी की, साथ की, प्यार की,  
किसी को त'आरुफ़ की है तलाश,   
तो कोई तकदीर की तस्वीर में खुद को रहा है तलाश। 

तमन्नाओं और ख्वाबों का हिस्सा बन्ना चाहता है कोई, 
तो किसी की ख्वाहिश है, तारीखों में तलाशा जाए,  
बस हो कुछ यूं कि हर तलाश जिंदगी के और करीब लाए, 
हर तलाश के बाद हम खुद को ज्यादा जान पाएं। 


  


Friday, August 13, 2021

आज़ादी


देश तो आज़ाद है मेरा..
लेकिन क्या होती है आज़ादी? 
क्या आज़ाद है देश का नौजवां?  
क्या आज़ाद है देश की बेटियां? 
सोचिए तो ए-जानाब आखिर कितना आज़ाद 
है हिदोस्तान? 

संविधान पर अपने गर्व है मुझको, 
लेकिन क्या वाकई है "धर्म" की आज़ादी?  
कानून तो सारे हैं यहां, 
पर क्या कर सकते लोग मर्जी से शादी,
हक मुझे हैं सब यहां, 
लेकिन क्या है मुझे बोलने की आज़ादी,  
देश तो आज़ाद है मेरा, 
लेकिन कहां है असली आज़ादी?

स्कूल तो गली गली में हैं, 
लेकिन क्या सबको मिल रही है,  
पढ़ने की आज़ादी?
भूख से आज़ाद नहीं हम, 
न है गरीबी से आज़ादी, 
सोच में जकड़ी आज़ादी, 
न्याय में जकड़ी आज़ादी,
बल में जकड़ी आज़ादी,  
देश तो आज़ाद है मेरा, 
लेकिन क्या है असली आज़ादी? 

कभी संस्कारों, कभी रिवाज़ों, 
कभी रिवायतों की भेंट चढ़ती है आज़ादी, 
कहीं बंधनों, कहीं जिम्मेदारियों के दायरों
में सिमटती है आज़ादी, 
कभी सोच, कभी ग़म, कभी प्यार में भी 
बंध जाती है आज़ादी, 
देश तो आज़ाद है मेरा, 
लेकिन क्या होती है आज़ादी? 

 
 

Monday, July 26, 2021

आखरी पन्ना

कई लोग कहते हैं, 
आसमां से पानी प्यार की तरह बरसता है,
इस बात पर मुझे कम ही यकीन होता है, 
ये तो मोहब्बतों का मौसम है, 
फिर भी न जाने क्यों इस मौसम में, मेरा दिल रोता है,

एक खलिश सी है रुबरू, 
हर इच्छा, हर चाह को दबाना सीख गई हूं, 
बारिश देख मुस्कुराना सीख गई हूं, 
नम हुईं आंखों में भरे पानी को, 
बारिश के साथ बहाना सीख गई हूं, 
खुद को कोस-कोस कर परेशान हूं, 
अपने प्यार करने से हैरान हूं,
पलकों के बांध अब आंसुओं को रोक नहीं पाते, 
खुद से किए वो वादे अब दिल हैं दुखाते, 
डर लगता है मुझे, बात वो कभी जुंबा पर न आ जाए, 
बनी बनाई जिंदगी पर कहर न ढा जाए। 
 
कई लोग कहते हैं, 
दोस्ती प्यार है, लेकिन उस इश्क का क्या करें 
जो खुद से बेज़ार है, 
सोचती हूं मैं,  ये कैसी चाहत है, कैसे जज़्बात हैं,
मेरी हर सोच से परे, कभी-कभी ये खुद से शर्मसार हैं, 
फिर सोचती हूं क्यों, इसमें शर्म की क्या बात है, 
एक अच्छे दोस्त की हर किसी को दरकार है, 
वो दोस्त जो रोने पर गले से लगा ले, 
वो दोस्त जो बातों बातों में हंसा दे, 
वो दोस्त जो अपनी सोच में जगह दे, 
वो दोस्त जो जज़्बात को जज़्बातों से समझे, 
मैं नहीं कहूंगी कि ऐसे दोस्त होते नहीं लेकिन,
ये दोस्ती खुशकिस्मतों को नसीब होती है शायद। 

कई लोग कहते हैं, 
मतलब के हैं दोस्त और मतलबी जमाना है,  
मैं मानती हूं कि यूं ही नहीं किसी ने साथ निभाना है, 
मैं जानती हूं काम निकल जाने के बाद, 
सब कुछ बदल जाना है, 
अपनी औकात खुद ही बनानी है, 
अपना दर्द खुद ही मुकाना है, 
फिर न जाने क्यों मेरे इन आंसुओं 
को ठिकाने की तलाश है, 
दोस्ती और इश्क के फसाने की आस है,
इस आस पर कब तक रहूंगी जिंदा मैं, 
मुझे अब जिंदगी के आखरी पन्ने का इंतजार है।  

Tuesday, July 20, 2021

आंखों की नमी


फिर हुईं आखें नम और प्यार याद आया,

दिल में छुपा के रखा, वो ख्याल याद आया,

इस दहलींज़ पर, अकेला, मेरा इंतजार है, 

मेरे प्यार को वहां से गुजरना भी नगवार है, 

फिर भी न जाने क्यों वो शक्स बार बार याद आया.   

बुनता है बेहिसाब जज़बातों की चादर ये दिल,

फिर जार जार रोता है ये दिल,

हुईं आखें नम और प्यार याद आया,

दिल में छुपा, वो इज़हार याद आया। 


अपने इश्क की सर ज़मीन तुमको मान लिया, 

अपनी हंसी, अपनी कमी तुमको जान लिया,

हां, हमारे रास्ते अलग हैं ये भी पहचान लिया। 

बस प्यार से चलती कहां है ये दुनिया, 

सिर्फ एहसासों से पिघलती कहां है ये दुनिया, 

चाहत के रास्तों पर हम ग़म से मयस्सर हैं, 

कोई हमसे भी टूट कर करे प्यार , 

ये ख्वाब हमारा, अरमानों के सर है।

फिर हुईं आखें नम और दिल को समझाया,

जिंदगी के इस पड़ाव पर कोई नहीं है तेरा हमसाया।    

 

Friday, July 9, 2021

ऐसा क्यों होता है


ऐसा क्यों होता है? वो आस पास है, 

फिर भी बहुत याद आता है।

ऐसा क्यों होता है? बात होती है, फिर भी 

खामोशी में कुछ दबा रहता है। 

ऐसा क्यों होता है? हर पल कुछ अधूरा सा 

लगता है।  

ऐसा क्यों होता है? उसके रंग हमारे लिए नहीं है,

ये एहसास घेर जाता है। 

ऐसा क्यों होता है?  ये प्यार सही ग़लत के दायरों में क्यों बंध जाता है? 

मुस्कुराहट, दो शब्द, कुछ पल और उसकी नज़रे इनायत,

कुछ ज्यादा तो नहीं मांग रहे, फिर भी ऐसा क्यों होता है,  

सूफी सा ये प्यार कुछ मांगता नहीं, जिससे भी होता है ये उसे बांधता नहीं, 

फिर भी ऐसा क्यों होता है? 

ऐसे प्यार को समझना इतना मुशकिल क्यों होता है? 



Monday, July 5, 2021

सफर खूबसूरत है, मंजल से भी


दिल के बंद दरवाज़े किर किरा कर खुले,

जिंदगी की तंग राहों पर कुछ फूल खिले,  

इश्क, प्यार और मोहब्बत की बातें हम करने लगे, 

कुछ साथ ऐसे मिले, जो नई उमंग जगा गए। 


अजनबी शहर, नए अंदाज़, कुछ भीगे अलफाज़

सुनसान राहों में वो गाने गुनगुनाने की आवाज़, 

कभी बारिश, कभी सुहानी हवा का चहरे पर वो एहसास, 

रास्ते में कभी ढेरों बातें, तो कभी बस सवाल एक आद,  

वो शहर घूमने घूमाने का जवां सा अंदाज़, 

बेतकलुफी से पार कर गया दिल के दरों दीवार। 


मैं सोचती थी, मुझमें जो इशक है उससे दिल-ए-ज़ार न होगा,  

प्यार जो ज़हन की गलियों में खोया है उसपर गौर न होगा,  

लेकिन, जिंदगी की डोर हमारे हाथ में नहीं, 

इस सफर की भोर हमारे हाथ में नहीं, 

तो अब कोई इश्तियाक, कोई इलतजा नहीं,  

इस खूबसूरत सफर को किसी मंजिल की चाह नहीं ।