Tuesday, October 22, 2019

Flashback

समय की छन्नी से छन रहा है हर लमहा,
वक्त कह रहा है, तू नहीं रहेगा तनहा,
तेरे साथ चलेगा यादों का कांरवा,
जिंदगी है एक सिनेमा
फ्लैश बैक चलता रहेगा,
कुछ खट्टी मीठी यादों से,
जीवन में रस घुलता रहेगा। 

शाम

शाम का धुंआ है,
दबा हुआ हर लमहा है,
कोई किसी से क्या कहे
यहां सहमा सहमा हर इंसान है
खामोशी की भी सांसे रुकी हैं,
किससे बंया करे परेशानियों की दास्तां
किस्मत का खेल कहें या होनी की कहानी,
सच तो ये हैं की हर कोई भीड़ में भी तनहा है,

Saturday, October 12, 2019

Mumbai Local


भीड़ में खड़े खड़े खुद में मगन, जब कोई अचानक से जागता है,
बड़ा मजा आता है, जब इनसान फोन से बाहर आता है,

अपनी मंजिल को खोजती उसकी आखें,
खुद से सवाल करती उसकी आखें,
नजारा जहां तक देख पाता है, खुद को गलत राह पर पाता है।

अब भाग कर क्या मिलेगा,
अब हांफ कर क्या मिलेगा,
फिर भी, वो एक दौड़ लगाता है,
जब भीड़ में खुद को तनहा पाता है।

सफर के दौरना तो कई लोग सो जाते हैं,
कमाल तो वो हैं, जो बीच सफर में, खुली आंख से खो जाते हैं,
बड़ा मजा आता है, जब इंसान फोन से बाहर आता है,
आसपास की भीड़ को देख चौंक जाता है,
बेसुध चलते चलते होश में आता है,

मंजिल की ओर नजर डाल, दो कदम आगे, तो दो कदम पीछे लेता है
सामने से निकलती गाड़ी को देख मायूस भी होता है,
फिर एक बार गरदन उठा आसमान की ओर देखता है,
अगली गाड़ी जूं ही आती है, उसके चहरे से शिकन हट जाती है। 

गुमसुम राहगीर हो, या अपने में गुम खुशनुमा कोई,
रास्ते की नवज़ को वही पकड़ पाता है,
जो जोश में होश के साथ आगे बढ़ जाता है।


Friday, September 27, 2019

शाम की लाली

अजब सा लाल रंग बिखरा है आसमान में
अजब सी ये लाली है
किसी के दिल से है निकली आग,
या है किसी की गुलाबी शाम का आगाज़,
ये तो तू ही जाने....

कोई खाली जेब लिए एक गुलाब से भी खुश है,
तो कोई पूरा गुलदस्ता पा कर भी है बदगुमान,
तेरे मन की किस तार को छेड़ रही है ये शाम, ये तो तू ही जाने
शाम की ये लाली तेरे लिए क्या लाई ये तो तू ही जाने,

पटरी पर धड़क धड़क चलती इस गाड़ी की रफतार,
इस शाम की ठंडी हवा के झोकों से गुलाबी होते गाल,
तू क्यों उठा रहा है इस शाम पर सवाल ये तो तू ही जाने,

अजब सा लाल रंग समेटे, ठहरा है सारा आलाम,
आसमान में हर तरफ बिखरे गुलाल की है सुर्खी,
मौज में उड़ते शांत सफेद बादल भी हैं यहां,
उखड़े उखड़े काले बादलों की टोली भी है वहां,
किस बादल के साथ तू चलेगे ये तो तू ही जाने,
किस बादल पर है तुझे विश्वास ये तो तू ही जाने,

हथेली भले ही आज खुशक है, बारिश की नमी से भरी है आखें,
क्या इसलिए शाम की लाली को देख मन बेकरार है?
जिंदगी के सुर्ख लमहों का हिसाब मांगती ये शाम,
ख्वाबों पर लालिमा की चादर बिछाती ये शाम,
क्या कहें किससे कहें, दिल के सब तारों को छेड़ गई ये शाम,
अजब सा लाल रंग बिखरा है आसमान में, अजब सी गुलाबी है ये शाम। 

Wednesday, August 28, 2019

मौहब्बत

मैं क्या कहूं, मैं क्या सुनाऊं, मौहब्बत के आगे मैं खो सा जाऊं

तेरी आखों में खुद को ढूंढू, तेरी बातों में जिक्र चाहूं
तेरे ख्यालों में रहना चाहूं, तुझे ख्यालों में रखना चाहूं,
कैसी ये बेखुदी है, जितना तेरे करीब आऊं, उतना खुद से मैं दूर जाऊं।

मैं क्या कहूं मैं क्या सुनाऊं, मौहब्बत के आगे मैं खो जाऊं

इशक के ये इम्तेहां हैं, अजियतों के दरमियां हैं,
दूर हो तुम, दूर हम हैं, साथ आने की वजह कम हैं,
तेरे बिना ये आंख नम है, पर तुझको पाने की चाह कम है,

मैं क्या कहूं मैं क्या सुनाऊं, मौहब्बत के आगे मैं खो जाऊं

दिल हर पल चाहे तेरी खुशी, तू बढ़े आगे है दुआ यही,
तेरी चमक में भीग जाऊं, तेरे सुर से सुर मिलाऊं,
कहां ये दुनिया, कहां ये लोग, कहेंगे क्या ये भूल जाऊं

मैं क्या कहूं मैं क्या सुनाऊं, मौहब्बत के आगे मैं खो जाऊं

Saturday, August 3, 2019

एक

एक जीवन, एक शब्द, एक आशा, कई इच्छाएं,
कुछ उम्मीदें, एक जिंदगी, कई लकीरें, एक विश्वास,
एक मोहब्बत, एक जान, कुछ सांसें, कई मौतें,
एक मौसम, कई बारिशें, कुछ आंसू,
एक दिल, कुछ उलझने, कई जवाब,
एक मंजिल, कुछ दरया, कई रास्ते
एक दोस्त, कुछ साथी, कई किस्से, कुछ कहानियां,
एक मन, कुछ एहसास लेकिन अपना क्या है.......
कुछ भी नहीं !

मन

रूई के फाहों सा उड़ता ये मन,
ठंडी हवा के झोंकों से छिड़ता ये मन,
सुरज की लाली सा जगमगाता ये मन,
मन नहीं मानो राग है कोई,
धरती के सुरों से अनुराग है कोई,
चंचल है, बेचैन नहीं, समय के सितम पर मुस्कुराता ये मन,
कभी किसी की चाह में मदहोश ये मन,
फिर जिंदगी की राह में बेहोश ये मन,
कभी रास्ते से भटकाता है, ये मन,
कभी मंजिलों तक पहुंचाता है, ये मन,
आशाओं के मोतियों को छुपाए, चुप चाप बैठा ये मन,
हर रात को नए ख्वाबों से सजाए ये मन,
हर सुबह की रंगत में इतराए ये मन,
इसे काबू में रखने को कहती है दुनिया,
दुनिया की इस सलाह को ठुकराए ये मन!