Monday, December 6, 2021

दो चहरे


जिंदगी में हर पल कुछ छूट रहा है, 
कुछ हिस्सों में दिल रोज़ टूट रहा है, 
कैसा अजीब शहर है ये, 
यहां हर कोई दो चेहरे लेकर घूम रहा है। 

दिखावे कि इज्ज़त, दिखावे कि दोस्ती, 
झूठा सा लग रहा है हर नया रिश्ता, 
यहां आम है बेवफाई का किस्सा, 
हर पल नए रंग दिखा रहा है जिंदगी का ये हिस्सा। 

रिश्तों की टोह लो तो लगता है पता, 
सत्ता का है खेल कहीं, 
तो कहीं नाम की है इच्छा, 
उम्र छोटी हो, चाहे अनुभव नया,
हर शक्स यहां है बस खुद में रमा।

यहां जिंदगी भाग नहीं रही, 
पर होड़ यहां भी है, 
बेफिक्री कि, दिखावे कि, पैसे कि होड़ 
शायद इसलिए दिखते नहीं लेकिन 
बेहद रूखे हैं यहां लोग।  

दुनिया ये काफी अलग है, 
पता नहीं सही है या गलत है, 
आंखें यहां बार बार भर आती हैं, 
कभी दुख तो कभी अफसोस से भीग जाती हैं। 

सुलझाने चले थे जिस जिंदगी को
उसे नए मोड़ पर खड़ा पाया है, 
इन नए सवालों, नए लोगों के बीच,  
शायद, राह की तलाश में कहीं गुम गए हैं, 
या हो सकता है, यही रास्ता मंजिल तक हमसाया है। 


No comments:

Post a Comment